एनसीए परियोजना: पूर्व तेज गेंदबाजों बालाजी, विनय और पंकज ने कूली के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया

नयी दिल्ली, छह सितंबर (क्रिकेट न्यूज़) स्तरीय गेंदबाजी कोच का पूल तैयार करने की कवायद के तहत राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) ने हाल में इंटर्नशिप (प्रशिक्षण) कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें लक्ष्मीपति बालाजी, आर विनय कुमार और पंकज सिंह जैसे जाने माने पूर्व खिलाड़ियों ने ट्रॉय कूली के मार्गदर्शन में अपने कोचिंग कौशल में इजाफा किया।

कूली अलग-अलग समय में आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड दोनों की पुरुष टीम के तेज गेंदबाजी कोच रह चुके हैं।

देश के अगली पीढ़ी के क्रिकेटरों के लिए खाका तैयार कर रहे एनसीए प्रमुख वीवीएस लक्ष्मण ने भारतीय क्रिकेट बोर्ड (बीसीसीआई) के आला अधिकारियों को और अधिक स्तरीय गेंदबाजी कोच तैयार करने की जरूरत के बारे में बताया था और इसके बाद भारत के लिए खेल चुके घरेलू क्रिकेट के दिग्गजों ने कूली के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लिया।

कूली के साथ आयोजित इस सत्र में लेवल दो के मौजूदा कोच ने हिस्सा लिया जिसमें चेन्नई सुपरकिंग्स के गेंदबाजी कोच बालाजी, मुंबई इंडियन्स के प्रतिभा खोज कोच विनय कुमार, राजस्थान के दिग्गज पंकज सिंह, मुंबई के अविष्कार साल्वी, केरल राज्य टीम के मुख्य कोच टीनू योहानन और कर्नाटक के तेज गेंदबाज श्रीनाथ अरविंद भी शामिल हैं।

ये सभी छह खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। बालाजी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप भी छोड़ी लेकिन चोट के कारण उनका करियर जल्द खत्म हो गया।

माना जा रहा है कि एनसीए ऐसे कोच को चुनना चाहता है जिनका अंतरराष्ट्रीय करियर नहीं तो कम से कम प्रथम श्रेणी करियर प्रभावशाली रहा है और एलीट स्तर पर क्रिकेट कोचिंग के बदले परिदृश्य से सामंजस्य बैठाने में सक्षम हैं।

सत्र को करीब से देखने वाले एक व्यक्ति ने पीटीआई को बताया, ‘‘उनका (कूली) कोच को प्रशिक्षण देने का तरीका उससे बहुत अलग है जो हमने भारत में देखा है। उनका मानना है कि कोच को किसी गेंदबाजी के नैसर्गिक रूप से मजबूत पक्ष से छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए। अगर गेंदबाजी सिर्फ इनस्विंग करने में अधिक सहज है तो उसे ऐसा ही करने दीजिए।’’

लेकिन कोच गेंदबाज से आउटस्विंग कैसे कराएगा जिसमें वह प्राकृतिक रूप से सक्षम नहीं है।

उन्होंने कहा, ‘‘कूली की प्रणाली से जो मुझे पता चला वह यह है कि वह गेंदबाज को आउटस्विंग करने का प्रयास करने को कहेगा। वह उसे तकनीक सिखाने की जगह खुद करके सीखने में विश्वास रखता है।’’

इस पूर्व प्रथम श्रेणी खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मान लीजिए कि अगर वह बल्लेबाज से गेंद को दूर ले जाया पाया तो फिर उससे पूछिए कि उसने क्या किया? गेंदबाजी में ‘क्यों’ काफी महत्वपूर्ण है। प्रत्येक खिलाड़ी को स्वयं से पूछना चाहिए कि ‘क्यों’ वह कुछ निश्चित चीजें कर रहा है। कोच को अपने शिष्यों में यह आदत डालनी चाहिए।’’

कोच सवाल पूछते हैं और छात्रों को जवाब देना होता है और इस तरह आपको समाधान मिलता है।

इस भावी कोच ने कहा, ‘‘कूली का मानना है कि समाधान हमेशा व्यक्ति के पास होता है और कोच का काम यह है कि वह उसे स्वयं इसे खोजने में मदद करे। क्योंकि जो व्यक्ति स्वयं जवाब ढूंढने के लिए प्रयास करता है तो वह उस हल को कभी नहीं भूलता। ’’

लेवल दो के कोच के प्रशिक्षण के अलावा युवा कोच को यह भी देखने का मौका मिला कि कैसे कूली गेंदबाजों (विशेषकर तेज गेंदबाजों) का आकलन कर रहे हैं जो एनसीए के इमर्जिंग (19 से 23 साल) शिविर का हिस्सा हैं।

तेज गेंदबाजों के लिए कूली ने एक साथ तीन नेट लगाए हैं जिनमें से प्रत्येक में उन्हें छह गेंद फेंकनी हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘एक नेट पर बल्लेबाजी क्रीज से एक मीटर की दूरी पर रस्सी लगाई गई है जो यॉर्कर लेंथ है। दूसरे नेट में छह से आठ मीटर के बीच में दो रस्सी बंधी हैं। तीसरे नेट में रस्सी को 10 मीटर पर बांधा गया है जो शॉर्ट गेंद की लेंथ है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘स्पिनरों के लिए सिर्फ चार मीटर की दूसरी पर एक रस्सी बांधी गई है।’’

इसके पीछे विचार यह देखना है कि युवा खिलाड़ी एक विशिष्ट लाइन और लेंथ पर लगातार कितनी गेंदबाजी कर सकता है, चाहे यह यार्कर हो, गुड लेंथ या शॉर्ट गेंद और फिर इसी के आधार पर डाटाबेस तैयार करना। इसके बाद उन्हें बताना कि वे क्या कर पा रहे हैं, वे क्या करने में सक्षम हैं और आखिर में उनसे क्या उम्मीद की जाती है।

भाषा

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