मैं मिजोरम में रग्बी के खेल को बढ़ावा देना चाहता हूं: संगजुआला ज़ोसंगुआला

28 साल की उम्र में, संगज़ुआला ज़ोसांगुआला (उर्फ ज़ुआला) 2016 से पेशेवर रग्बी खेल रहे हैं। वो इंडोनेशिया में एशियाई सेवन्स ट्रॉफी टूर्नामेंट में पांचवें स्थान पर रहे और जीत हासिल की।
2019 में राष्ट्रीय खेलों में रजत पदक हासिल की। मिजोरम में रग्बी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, जुआला आगामी टूर्नामेंटों के लिए खुद को तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहें है और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक प्रेरणा के रूप में सेवा करने का लक्ष्य रखते है।

इस विशेष साक्षात्कार में, जुआला ने खेल से परिचित होने, अब तक की उनकी उपलब्धियों, एशियन सेवन्स ट्रॉफी टूर्नामेंट में अनुभव, मिजोरम में खेल को बढ़ावा देने, चुनौतियों पर काबू पाने और अपने भविष्य के लक्ष्यों के बारे में बात की।

Q 1) आप मिज़ोराम से है एक ऐसा राज्य जो रग्बी के लिए नही जाना जाता, इस खेल से आपका परिचय कैसे हुआ? किस बात से प्रेरित होकर आपने इस खेल को प्रोफेशन के तौर पर अपनाया? 

मुझे सबसे पहले सेना में रग्बी खेलने के लिए कहा गया था और मुखे खेल पसंद आया। यह सेना ही थी जिसने मुझे इस खेल से परिचित कराया।

Q 2) आप 2016 से पेशेवर रूप से रग्बी खेल रहे हैं, आपका अबतक का अनुभव कैसा है और आपकी सबसे खास उपलब्धि क्या है?

अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि 2019 राष्ट्रीय खेलों में रजत पदक जीतना होगा।

Q 3) इंडोनेशिया में हुए एशियाई सेवन्स ट्रॉफी टूर्नामेंट में अपने अनुभव के बारे में बताएं जहां टीम पांचवें स्थान पर रही।

यह मेरा पहला अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट था और मैं ईमानदारी से कहूं तो थोड़ा नर्वस था क्योंकि मेरे पास बहुत कम अनुभव था। उस टूर्नामेंट में खेलना एक शानदार अनुभव था क्योंकि मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। देश के लिए सीनियर खिलाड़ियों के साथ खेलना वाकई एक खास अहसास था।

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Q 4) एक अनुभवी रग्बी खिलाड़ी के रूप में, आप मिजोरम में खेल को कैसे बढ़ावा देना चाहते हैं?

मैं मिजोरम में रग्बी को बढ़ावा देना चाहता हूं लेकिन ऐसा करने के लिए, मुझे राहुल बोस (भारतीय रग्बी फेडरेशन के अध्यक्ष) से ​​बात करने की जरूरत है क्योंकि मैं सेना में हूं और मैं अपने दम पर खेल को बढ़ावा नहीं दे सकता।

Q 5) आपके पेशेवर रग्बी करियर में आपको किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा है? आपने उन्हें कैसे मात दी?

जब मैं सेना की टीम में था तो एक जगह के लिए बहुत अधिक प्रतिस्पर्धा थी। 50 खिलाड़ियों में सिर्फ 12 का ही चयन होना होता था और जो जगह मैं चाहता था वहां पहले से ही एक अनुभवी वेटरन खिलाड़ी मौजूद थे, लेकिन अंततः अपनी कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ मैं भारतीय राष्ट्रीय रग्बी टीम में स्थान प्राप्त किया।

Q 6) आपके भविष्य के लक्ष्य क्या हैं? आप उन्हें हासिल करने के लिए कैसे काम कर रहे हैं?

अभी भविष्य का लक्ष्य आगामी टूर्नामेंटों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना है। मैं अपने खेल में नियमित निरंतरता दिखा कर और अपनी कमजोरियों में सुधार करके इसे हासिल करने की योजना बना रहा हूं।

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