भारतीय पहलवानों को कुश्ती में मिलेगी कड़ी चुनौती; बजरंग, अमन और अंतिम पदक के मजबूत दावेदार

हांगझोउ, तीन अक्टूबर (भाषा) ओलंपिक पदक विजेता भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया एशियाई खेलों में जब कुश्ती स्पर्धा में चुनौती के लिए मैट पर उतरेंगे तो उन्हें एक साथ कई सवालों के जवाब देने होंगे।

हांगझोउ, तीन अक्टूबर (भाषा) ओलंपिक पदक विजेता भारतीय पहलवान बजरंग पूनिया एशियाई खेलों में जब कुश्ती स्पर्धा में चुनौती के लिए मैट पर उतरेंगे तो उन्हें एक साथ कई सवालों के जवाब देने होंगे।

बजरंग डब्ल्यूएफआई (भारतीय कुश्ती महासंघ) के निवर्तमान प्रमुख बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने और धरने पर बैठने वाले पहलवानों में शामिल थे। उन्हें ट्रायल के बिना इन खेलों के लिए भारतीय दल में शामिल करने की भी आलोचना हुई।

विशाल कालीरमण ने 65 किग्रा का ट्रायल जीता था और उनके परिवार तथा कई पंचायतों का  मानना है कि बजरंग को ट्रायल के बिना इन खेलों में मौका नहीं मिलना चाहिए था।

पिछले एशियाई खेलों के चैंपियन बजरंग इन खेलों में भाग लेने से पहले किसी प्रतिस्पर्धी मुकाबले में हिस्सा नहीं लिया है।

वह ‘लेग डिफेंस’ की अपनी खामी को दूर करने की कोशिश कर रहे थे और ऐसे में यह देखना होगा कि किर्गिस्तान में 18 दिनों के अभ्यास और प्रशिक्षण सत्र से उन्हें कितना फायदा होगा।

बजरंग फिलीपींस के रोनिल टुबोग के खिलाफ अपने अभियान का आगाज करेंगे। वह अगर आगे बढ़ने में सफल रहे तो उनके सामने प्री-क्वार्टर फाइनल में बहरीन के अलिबेग अलिबेगोव की चुनौती होगी।

बजरंग की श्रेणी में दमदार प्रदर्शन करने वाले कई खिलाड़ी हैं। इसमें मौजूदा एशियाई चैंपियन और 2022 विश्व चैंपियन ईरान के रहमान अमौजादखलीली शामिल हैं। वह और बजरंग अगर सेमीफाइनल में पहुंचे तो दोनों एक दूसरे के आमने सामने हो सकते हैं।

बजरंग के निजी कोच सुजीत मान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमने किर्गिस्तान में कड़ी मेहनत की। हमने किर्गिस्तान की राष्ट्रीय टीम के साथ अभ्यास किया। लेकिन प्रतिस्पर्धी मुकाबले खेलने की अनुभव की जगह कोई नहीं ले सकता, इसलिए यह एक कठिन प्रतियोगिता होगी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ इस प्रतियोगिता में दुनिया के शीर्ष आठ में से चार-पांच पहलवान शामिल है। अब छोटे देशों के पहलवान भी अच्छा कर रहे हैं ऐसे में कुश्ती प्रतिस्पर्धा काफी कठिन होगी।’’

बजरंग की तरह दीपक पूनिया (86 किग्रा) ने भी राष्ट्रमंडल मंडल खेलों (2022) के बाद कोई प्रभावी प्रदर्शन नहीं किया है।

अमन सेहरावत 57 किग्रा वर्ग में पदक के दावेदार होंगे। पिछले दो वर्षों में उन्होंने अपने कौशल में काफी सुधार किया है। उन्होंने अंडर 23  विश्व चैंपियन बनने के बाद सीनियर स्तर पर एशियाई चैम्पियनशिप का खिताब जीता था।

कुश्ती प्रतियोगिता बुधवार से ग्रीको रोमन शैली में शुरू हो रही है, जहां भारत ने 2010 सत्र के बाद से कोई पदक नहीं जीता है।

रविंदर सिंह और सुनील राणा के बाद किसी भारतीय पहलवान ने ग्रीको रोमन में पदक नहीं जीता है।

भारत को महिला पहलवानों से अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद है। अंतिम पंघाल के नेतृत्व में महिला टीम मजबूत दावेदारों से भरी हुई है।

पंघाल शानदार लय में हैं। अंडर 20 विश्व चैंपियनशिप जीतने के बाद हिसार की इस 20 साल की खिलाड़ी ने सीनियर विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक के साथ पेरिस ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया है।

चयन ट्रायल में पूजा गहलोत और मानसी अहलावत ने भी प्रभावित किया था। भारत ने 2018 में बजरंग और विनेश फोगाट के माध्यम से दो स्वर्ण जीते थे, जबकि दिव्या काकरान ने कांस्य पदक जीता था।

भारतीय कुश्ती दल:

ग्रीको रोमन: ज्ञानेंद्र (60 किग्रा), नीरज (67 किग्रा), विकास (77 किग्रा), सुनील कुमार (87 किग्रा), नरिंदर चीमा (97 किग्रा) और नवीन (130 किग्रा)।

महिला फ्रीस्टाइल: पूजा गहलोत (50 किग्रा), अंतिम पंघाल (53 किग्रा), मानसी अहलावत (57 किग्रा) सोनम मलिक (62 किग्रा) राधिका (68 किग्रा) और किरण (76 किग्रा)।

पुरुष फ्रीस्टाइल: अमन सहरावत (57 किग्रा), बजरंग पूनिया (65 किग्रा), यश (74 किग्रा), दीपक पूनिया (86 किग्रा) विक्की (97 किग्रा) और सुमित (125 किग्रा)।

Source: PTI News

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